Hanuman Chalisa Lyrics (Good) in Hindi || BEST of 2022

Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi

 


Hanuman Chalisa Lyrics in hindi


Album-Hanuman chalisa Lyrics

Lyrics-Tulsidas

Singer-Hariharan

Music Label-T-Series

ComposedBy-Lalit sen/Chander


    श्री हनुमान चालीसा दोहा 

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुर 

सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल 

चारि ॥ 

बुद्धिहीन तनु जानिकै सुमिरौं 

पवनकुमार । 

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस 

बिकार ॥


  ।। चौपाई ।। 


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । 

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ 


राम दूत अतुलित बल धामा । 

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ 


महावीर विक्रम बजरंगी । 

कुमति निवार सुमति के संगी ॥ 


कंचन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ 


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । 

काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥


शंकर सुवन केसरी नंदन । 

तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ 


विद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥ 


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । 

राम लखन सीता मन बसिया ॥ 


सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ 


भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचन्द्र के काज सँवारे ॥


लाय सँजीवनि लखन जियाए ।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाए ॥ 


रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई । 

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । 

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ 


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । 

नारद सारद सहित अहीसा ॥ 


जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते । 

कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते ॥


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । 

राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥ 


तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना । 

लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥


 जुग सहस्र जोजन पर भानू । 

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥


दुर्गम काज जगत के जेते । 

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥


राम दुआरे तुम रखवारे । 

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥


सब सुख लहै तुम्हारी शरना । 

तुम रक्षक काहू को डरना ॥ 


आपन तेज सम्हारो आपै । 

तीनौं लोक हाँक ते काँपे ॥


भूत पिशाच निकट नहिं आवै । 

महाबीर जब नाम सुनावै ॥ 


नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥


संकट तें हनुमान छुड़ावै । 

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥


सब पर राम तपस्वी राजा । 

तिन के काज सकल तुम साजा ॥ 


और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोहि अमित जीवन फल पावै ॥ 


चारों जुग परताप तुम्हारा ।

 है परसिद्ध जगत उजियारा ॥


साधु संत के तुम रखवारे । 

असुर निकंदन राम दुलारे ॥ 


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । 

अस बर दीन्ह जानकी माता ॥ 


राम रसायन तुम्हरे पासा । 

सदा रहो रघुपति के दासा ॥ 


तुम्हरे भजन राम को पावै । 

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ 


अंत काल रघुबर पुर जाई । 

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥


और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥


संकट कटै मिटै सब पीरा । 

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥


जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥


जो शत बार पाठ कर कोई । 

छूटहि बंदि महा सुख होई ॥


 जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । 

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥


 तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

 कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥


 ।।  श्री हनुमान चालीसा दोहा  ।। 

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पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप । 

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

      


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